भारतीय ज्योतिष के प्राचीन प्रारुप को देखा जाए तो वहां फलित ज्योतिष का भाग बहुत छोटा है। वेदान्त में वर्णित ज्योतिष खण्ड वास्तव में एस्ट्रॉनमी है। प्राचीन भारत में ज्योतिष का अर्थ ग्रहों और नक्षत्रों की चाल का अध्ययन करने के लिए था। यानि ब्रह्माण्ड के बारे में अध्ययन। कालान्तर में फलित ज्योतिष के समावेश के चलते ज्योतिष शब्द के मायने बदल गए और अब इसे लोगों का भाग्य देखने वाली विद्या समझा जाता है। फलित ज्योतिष में जहां ग्रह नक्षत्रों की चाल का इतना सूक्ष्म विश्लेषण किया गया है कि एक हजार साल बाद इन आकाशीय पिण्डों की क्या स्थिति होगी इस बारे में सटीक भविष्यवाणी की जा सकती है। विशुद्ध गणितीय फार्मूलों के आधार पर। जहां तक फलित की बात है प्राचीन भारतीय पुस्तकों में कई जगह इसके चकित कर देने वाले संकेत मात्र मिलते है। जैसे नारद पुराण। कहते हैं शिव ने नारद को चौरासी लाख सूत्र बताए। इनमें से अधिकांश नष्ट हो गए और अब महज चौरासी सूत्र बचे हैं। इसके अलावा रुद्रअष्टाध्यायी में पांचवे अध्याय में ग्रहों के दुष्प्रभाव और इनसे बचाव का विश्लेषण सूत्रों में ही दिया गया है। इसके अलावा ब्रह्मा को फलित ज्योतिष का जनक माना गया है। कुल 12 ज्योतिष राशियाँ होती हैं, और प्रत्येक राशि की अपनी ताकत और कमजोरियां, अपने स्वयं के विशिष्ट गुण, इच्छा एवं जीवन तथा लोगों के प्रति रवैया होता है। आकाश की छवियों, या जन्म के समय ग्रहों की स्थिति के विश्लेषण के आधार पर ज्योतिष हमें एक व्यक्ति की बुनियादी विशेषताओं, प्राथमिकताओं, कमियों और भय की एक झलक दे सकता है। अगर हम राशियों की बुनियादी विशेषताओं को जान लें तो हम वास्तव में लोगों को बहुत बेहतर जान सकते हैं। राशिफल की 12 राशियों में से प्रत्येक एक विशिष्ट राशि तत्व के अंतर्गत आती हैं। चार राशिचक्र तत्व हैं: वायु, अग्नि, पृथ्वी और जल और उनमें से हरेक हमारे भीतर कार्यरत एक अनिवार्य प्रकार की उर्जा का प्रतिनिधित्व करते हैं। ज्योतिष का लक्ष्य हमें सकारात्मक पहलुओं पर इन ऊर्जा का ध्यान केंद्रित करना और हमारे सकारात्मक गुणों की एक बेहतर समझ पाने और नकारात्मकता से निपटने में मदद करना है। हम सभी में यह चार तत्व मौजूद हैं और वे ज्योतिषीय राशियों से जुड़े चार विलक्ष्ण व्यक्तित्व प्रकारों का वर्णन करते हैं। चार राशिचक्र तत्व बुनियादी चरित्र गुणों, भावनाओं, व्यवहार और सोच पर गहरा प्रभाव दर्शाते हैं।

ज्योतिष-विद्या क्या है?

द वर्ल्ड बुक इनसाइक्लोपीडिया के मुताबिक, ज्योतिष-विद्या “इस विश्वास पर आधारित है कि आकाश के नक्षत्रों की स्थिति के ज़रिए एक इंसान के स्वभाव या उसके भविष्य का पता लगाया जा सकता है।” ज्योतिषी दावा करते हैं कि एक इंसान के जन्म के वक्त ग्रहों की स्थिति और राशि-चक्र के चिन्हों का उसकी आगे की ज़िंदगी पर असर पड़ सकता है।* किसी एक खास घड़ी में, इन नक्षत्रों की स्थिति को जन्म कुंडली कहा जाता है।

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